Wednesday, April 7, 2010

मैं कौन हूँ , एक लाचारी सी ..


मैं कौन हूँ , एक लाचारी सी .. मैं कौन हूँ, अबला नारी सी..

मैं कौन हूँ , जिसने जन्म दिया तुम सबको को अपने आँचल में..

मैं कौन हूँ, जिसने सींचा है तुमको हरपल में I

मैं कौन हो जिसको नहीं पता, बच्चे उसके गोरे है या काले है..

मैं कौन हूँ जिसको नहीं पता कितने मेरे पाँव में छाले हैं I

मैं कौन हूँ , एक लाचारी सी .. मैं कौन हूँ, अबला नारी सी..

मैं कौन हूँ, जो नहीं है सोती रातों को,

मैं कौन हूँ, जो देती है छतरी, रूकती चलती बरसातों को I

मैं कौन हूँ, जो देती है रोटी , अपने हर भूखे बच्चे को ..

मैं कौन हूँ, जिसने प्यार दिया हर झूठे या फिर सच्चे को I

मैं कौन हूँ , एक लाचारी सी .. मैं कौन हूँ, अबला नारी सी..

मैं कौन हूँ , जो डर जाती है, अपने बच्चों से कभी कभी..

मैं कौन हूँ , जो रो जाती है , अपने बचों से कभी कभी I

मैं कौन हूँ, जो अपने बच्चों को देख-देख मुस्काती है,

मैं कौन हूँ, जो हर छोटे धमाकों से डर जाती है I

मैं कौन हूँ , एक लाचारी सी .. मैं कौन हूँ, अबला नारी सी..

मैं कौन हूँ, जिसका की कोई धर्म नहीं,

मैं कौन हूँ , जिसके बच्चों में शर्म नहीं I

मैं कौन हूँ, जिसके बच्चे, खुद मेरे लिए ही लड़ते हैं,

मैं कौन हूँ जिसके बच्चे, भाषा,क्षेत्र पर मरते है..

मैं माँ हूँ ,हर उस बच्चे की जो मेरे आँचल में सोता है,

मैं माँ हूँ , हर उस बच्चे की जो भूख से व्याकुल रोता है.

कुछ मान करो कुछ शर्म करो मुझ बेबस अबला माँ की भी,

ज़रा फिक्र करो ज़रा सोचो तो , हर जाती हुई जान की भी..

मैं कौन हूँ? मैं तो माँ हूँ ..मैं 'मुंबई' हूँ..





-प्रशांत गुप्ता

www.krantee.com

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