Saturday, June 19, 2010

..मेरी माँ ..





कभी तपती जैसे सूरज सी, कभी शीतल जैसे चन्दन सी,
कभी सौंधी जैसे मिटटी सी, कभी मीठी जैसे मधुबन सी..


कभी जोर-जोर चिल्लाती थी, कभी लोरी गाके सुलाती थी,
कभी खिलाके सबको घर में, खुद भूखी ही सो जाती थी..


कभी ऊँगली पकड़ के चलाती थी, कभी थपकी देकर सुलाती थी,
कभी जो रूठ जाता था मैं, तो 'टॉफी' देकर मनाती थी..


कभी जो थक जाता था में,तो गोदी में उठाती थी,
कभी न सुन मेरे बहानों को, डांट-डांट नहलाती थी..



कभी लगे जो चोट मुझे, तो अपने आंसू बहाती थी,
कभी खुद सो जाती थी गीले में, मुझको सूखे में सुलाती थी.



कभी कभी अनजाने में, न जाने कौन सा गीत गुनगुनाती थी,
कभी खिलाके 'चुपड़ी' हमें , खुद सूखी रोटी खाती थी..



कभी जो पढ़ता नहीं था मै, 'पापा' का डर दिखलाती थी,
कभी कभी वही फिर 'पापा' से , मेरी शैतानियाँ छुपाती थी..



कभी जो डर जाता था मैं, तो आँचल में छुपलाती थी,
कभी फिर वो खुद ही मुझे, 'चौकलेट' खाने से डराती थी..



माँ रिश्ता एक पूजा है, जो जीवन को सुधराता है,
बड़ा होकर फिर पुत्र वही, निज 'पूजा' में रम जाता है..
मत भूल उसी माँ ने तुझे , छाती से अमृत पिलाया था,
बुरी-बुरी नज़रों से बचा के, काला टीका भी लगाया था.
माँ तुलसी है, माँ चन्दन है, माँ केसर की क्यारी है,
माँ ही हर घरकी शोभा है, माँ हर घर की फुलवारी है..



-प्रशांत गुप्ता

+91-9925143545

13 comments:

  1. अदभुद रचना! हर शेर कमाल का ! गहरा भाव और गहरा अर्थ! कमाल की रचना

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  2. bahut khub prashant soch nahi tha tum itna badiya likh bhi lete ho......gr8...and keep it up! mmaa ke prati tumhari bhavnao ko jaan kar kafi achha laga...

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  3. bhai MAA se dur hokar or ye kavita padhkar aankhe bhar aayi, aakhir MAA to MAA he hoti chahe vo kisiki kyu na ho.............

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  4. kya baat hai yaar. bahut hi achchi kavita likhi hai prashant bhai. keep it up

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  6. बहुत बहुत खूबसूरत लिखा है आपने,,, लगता है जैसे हर माँ का यही एक रूप होता है... ईश्वर तक हर एक के लिए अलग अलग रूपों में होता है,, लेकिन हर एक की माँ उसके लिए वैसे ही होती है जैसे कि किसी और की माँ उसके लिए!!
    बेहद सुन्दर कविता!!

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    1. उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद पारुल जी , निश्चित ही आप सभी के ये प्रेरणादायी शब्द मेरी लेखनी को एक अप्रतीम बल प्रदान करते हैं..सादर.

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    2. आपने इस छोटी सी कविता से पूरी बात ही कह डाली सर जी ...!!
      इसकी तारीफ में प्रयुक्त होने वाले अल्फाजों को खोजने क लिए थोडा टाइम दीजिये ...

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  7. awesome , wonderful dnt hv words to explain my feelings.

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  8. speechless...maa jaisa koi nahi...

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    1. Thnx Rajni Ji .. Bilkul sahi kaha aapne.. Maa jaisa koi nahi ...

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