Thursday, December 15, 2011

...मेरा क्या है .. मुझे तो आदत है ...



ऐ ख़ुदा ! कि कितना बदनसीब हूँ मैं..

तू जितना दूर है मुझसे ..उतना करीब हूँ मैं...

कमा के देख लिया दुनिया का हर कागज़ ..

लेकिन मोहब्बत में ..तुझसे ग़रीब हूँ मैं.. 

चल लूट ले मुझको .. मैंने जो भी कमाया है ..

कि लेने इश्क के बदले, मेरी जां को तू आया है ..

सुकूं ले ले , नींद ले ले, भले फिर भी, 

उस तस्वीर को न ले... जो मेरे तन का साया है.. 

ज़रा सा एक करम करना, अगर कर सके जो तू , 

मेरे सीने के ऊपर एक घाव है ,अगर वो भर सके जो तू ..

मुझे मालूम है.. नहीं करता यकीं तू एहसानों में , 

मुझे जीना है तेरी यादों में , अगर ये कर सके जो तू ..

तेरा हर आंसू है एक मोती , तेरी हर आह कहानी है .. 

मेरा क्या है ? मेरी आँखों में तो बस नमकीन पानी है ..

तेरा हर बाल है रेशम , तेरा तो नूर है रोशन, 

मेरी छोटी सी एक दौलत, वो तेरी इक निशानी है..







 - © प्रशांत गुप्ता - 15-12-2011

Monday, August 15, 2011

अभी तो मैं गुलाम हूँ ..



अभी तो मैं गुलाम हूँ ..

नहीं हूँ मैं आज़ाद अभी .. नहीं हूँ मैं आबाद अभी..

नहीं मनाऊंगा जश्ने-ए-आज़ादी ..नहीं लगाऊंगा तिरंगा छाती पर ..

नहीं पहनूंगा नया कुर्ता , नहीं गाऊंगा गीत देश के ..

नहीं खाऊंगा लड्डू-पेड़े , नहीं बोलूँगा जय हिंद ..

अभी तो मैं गुलाम हूँ ..

गुलाम हूँ मैं, सुरसा जैसी बढती महंगाई का ..

गुलाम हूँ मैं, दिन-बर-दिन गिरती कमाई का ..

गुलाम हूँ मैं, इन सारे भ्रष्ट नेताओं का ..

गुलाम हूँ मैं, गरीबी 
से घिरी फिज़ाओं का  ..


गुलाम हूँ मैं, पेट पर पड़ती चोट का ..

गुलाम हूँ मैं, एक हरे रंग के नोट का ..

गुलाम हूँ मैं, ठंढे पड़ते चूल्हे का ..
गुलाम हूँ मैं, खेतों में गुमते पूले  का ..


गुलाम हूँ मैं, पल-२ बढ़ते आतंक का ..

गुलाम हूँ मैं, जातिवाद के डंक का ..

अभी तो मैं गुलाम हूँ ..

नहीं हूँ मैं आज़ाद अभी .. नहीं हूँ मैं आबाद अभी..







-प्रशांत गुप्ता 

15/08/2011

+91-9925143545