ऐ ख़ुदा ! कि कितना बदनसीब हूँ मैं..
तू जितना दूर है मुझसे ..उतना करीब हूँ मैं...
कमा के देख लिया दुनिया का हर कागज़ ..
लेकिन मोहब्बत में ..तुझसे ग़रीब हूँ मैं..
चल लूट ले मुझको .. मैंने जो भी कमाया है ..
कि लेने इश्क के बदले, मेरी जां को तू आया है ..
सुकूं ले ले , नींद ले ले, भले फिर भी,
उस तस्वीर को न ले... जो मेरे तन का साया है..
ज़रा सा एक करम करना, अगर कर सके जो तू ,
मेरे सीने के ऊपर एक घाव है ,अगर वो भर सके जो तू ..
मुझे मालूम है.. नहीं करता यकीं तू एहसानों में ,
मुझे जीना है तेरी यादों में , अगर ये कर सके जो तू ..
तेरा हर आंसू है एक मोती , तेरी हर आह कहानी है ..
मेरा क्या है ? मेरी आँखों में तो बस नमकीन पानी है ..
तेरा हर बाल है रेशम , तेरा तो नूर है रोशन,
मेरी छोटी सी एक दौलत, वो तेरी इक निशानी है..
- © प्रशांत गुप्ता - 15-12-2011
