
वो छोटी छोटी बातों पर , झट से लड़ जाना याद है क्या..
वो लम्बी लम्बी मांगो को, रो कर मनवाना याद है क्या..
वो उड़ाना ऊंची पतंगों को, फिर भागना मीलों पकड़ने को..
वो मेरे सारे कंचों को , लेकर गुम जाना याद है क्या.
वो छोटी छोटी....
वो हर सुबह पेट दर्द , रोना और चिल्लाना ,
वो हर दिन नया बहाना, मम्मी को सुनाना याद है क्या..
वो छोटी छोटी..
वो करना झगड़ा दोस्तों से , वो मारना पत्थर शीशों पे,
वो आना लोगों का घर पर, झट से छुप जाना याद है क्या ..
वो छोटी छोटी..
वो चुपके से साइकिल ले जाना, गिर गिर कर भी चलाना
वो बाजू वाले के डोर बेल को, बजा कर छुप जाना याद है क्या .
वो छोटी छोटी बातों पर , झट से लड़ जाना याद है क्या..
वो लम्बी लम्बी मांगो को, रो कर मनवाना याद है क्या..
-प्रशांत गुप्ता
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dil se likhi baaten hamesha dil ko chu jaati hain
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