Thursday, June 17, 2010

ये कैसा विकास? खाद्य नमक बनता 'सफ़ेद ज़हर'













औद्योगिक विकास रुपी अजगर किस प्रकार से गुजरात की प्राकृतिक संपदा को अपना ग्रास बनाता जा रहा है , इसका जीवंत प्रमाण कच्छ में उत्पादित नमक का औद्योगिक प्रदूषकों एवं रासायनिक कचरे की वजह से की वजह से काला पड़ जाना है,

कच्छ में उत्पादित खाद्य नमक में यहाँ के उद्योगों से निकलने वाला धुवां और औद्योगिक कचरा खाद्य नमक में घुलता जा रहा है,ये कचरा कच्छ में नमक के खेतों के इर्द-गिर्द मौजूद कारखानों की चिमनियों से कार्बन के रूप में खाद्य नमक के ऊपर जमा हो जाता है, जिसको परिष्कृत करने का कोई भी साधन कच्छ में स्थित किसी भी नमक के कारखाने में नहीं है,शोधन करने पर यह नमक काला पड़ जाता है, कई उत्पादक इस नमक को औद्योगिक उपयोग हेतु विभिन्न कंपनियों को बेच देते है हैं, लेकिन वहीँ कुछ कम्पनियाँ बिना इस नमक को शोधित किये हुए, इस प्रदूषित नमक को खाद्य नमक के रूप में देश के विभिन्न बाजारों में भेज देती हैं, जिसकी वजह से हालात बद से बदतर होते चले जा रहे हैं और आम नागरिक अनजाने में ही इस 'सफ़ेद ज़हर' को निगलने पर मजबूर है.




ज्ञात हो की नमक कच्छ के ९०% से ज्यादा नमक भारतीय उत्पादन मानकों का अनुसरण ही नहीं करते हैं, दरअसल नमक के उत्पादन से बिक्री और खपत होने तक ज्यादातर ग्राहक नमक के इस प्रकार प्रदूषित होने की कल्पना भी नहीं कर सकता. नमक विभाग की नीतियाँ भी इतनी लचर हैं की की इस पूरी प्रक्रिया में उत्पादक को कभी भी किसी जांच से नहीं गुजरना पड़ता है. शायद ही देश का कोई स्त्री, पुरुष या बच्चा ऐसा होगा जिसके दैनिक भोजन में नमक न शामिल हो, लेकिन इस नमक के रूप में हम खतरनाक रसायन भी निगल सकते है इसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता है..

गौरतलब है की कच्छ देश के कुल सकल घरेलु नमक उत्पाद का लगभग ६५% नमक का उत्पादन करता है, यहाँ पर छोटी बड़ी मिलकर लगभग ५०० इकाइयाँ हैं जो घरेलु एवं औद्योगिक नमक का उत्पादन करती हैं, कच्छ में सालान लगभग ६०-७० लाख टन नमक का उत्पादन होता है, जिसमें से लगभग ९०% नमक की खपत घरेलु बाज़ार में होती है और बाकि का निर्यात कई खाड़ी देशों एवं सुदूर पूर्वी देशों को किया जाता है.

२००१ में कच्छ में आई भयानक भूकंपीय त्रासदी के बाद सरकार के द्वारा कच्छ की पुनर्स्थापना हेतु उद्योगों को विभिन्न प्रकार की कर-रियायतें दी गयी, जिसके फलस्वरूप अनेकोनेक स्टील एवं बिजली उत्पादक इकाइयाँ यहाँ पर स्थापित हो गयीं.

गांधीधाम चम्बर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष 'हीरालाल पारीख का कहना है कि 'सरकार की योजनों के फलस्वरूप एक और जहाँ लगभग २,००,०००  करोड़ का निवेश कच्छ में आया, जो की अपने साथ बहुत सी प्रदूषण जनक इकाइयाँ जैसे स्टील उद्योग, कोयला आधारित उद्योग एवं खाद्य तेल कारखाने भी लाया, जिसका परिणाम कच्छ के स्थानीय नमक उद्योग एवं उससे आश्रित लाखों लोगों को झेलना पड़ रहा है,"
उनका यह भी आरोप है के कच्छ में फिलहाल कुल ३० के करीब स्टील प्लांट मौजूद हैं, जिनको प्रदूषण मानकों के अनुरूप 'ईएसपी चिमनी' लगनी थी लेकिन ज्यादातर ने तो या तो ये 'इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर' इकाइयां लगवाई ही नहीं है , या तो लगवाने के बावजूद उसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है.

अध्यक्ष का ये भी कहना है कि, इस प्रदुषण के चलते कई नमक के कारखाने बंद हो गए हैं और उन पर आश्रितों के लिए आजीविका की समस्या उत्पन्न हो गयी है, नमक उत्पादकों के साथ स्थानीय कांडला पोर्ट ट्रस्ट का भी सौतेला बर्ताव है, व्यापारियों की मांग है उनको अपने नमक के खेत किसी और जगह पर स्थानांतरित करने के लिए भू-वर्ग दिया जाए, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

नमक उपायुक्त एम् ऐ अंसारी का कहना है " हम लोग इसकी जांच कर रहे हैं,अगर इस प्रकार का प्रदूषित नमक चमड़ा उद्योगों को बेचा जाता है तो किसी प्रकार का खतरा नहीं है, लेकिन अगर इसका इस्तेमाल खाद्य नमक के रूप में किया जाता है तो हानिकारक हो सकता है "

गुजरात में विकास का दंभ भरने वाली मोदी सरकार एक और जहाँ निवेशकों को आकर्षित करने के लिए तरह-तरह की 'रेवड़ियाँ ' बाँट रही है, वही दूसरी और इस विकास की कीमत वहां के आम किसानो एवं प्राकृतिक संपदा को चुकानी पड़ रही है. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि " इन उद्योगों के आने से फायदा केवल बड़े भू-माफियाओं या सरकार को ही हुआ है, हमारी स्थितियां तो पहले से भी बदतर हो गयीं हैं, स्थानीय कृषि कि हालत खस्ता है, मुन्द्रा एवं आस पास के समुंद्री किनारों पर अदानी उद्योग द्वारा समुन्द्र का अधिग्रहण एवं औद्योगिक कचरे कि वजह से मंग्रोव वन लगभग समाप्ति की कगार पर पहुँच गए हैं, मछलियों कि संख्या भी दिन-पर-दिन कम होती जा रही है जिससे मछुवारों के लिए भी रोजी-रोटी जुटा पाना बहुत कठिन होता जा रहा है, "

-द्वारा

प्रशांत गुप्ता

+91-9925143545

(krantee.india@gmail.com)

1 comment:

  1. Nice written article.. but not covering full details.. there are lots of other issues related to this trade..

    Sarvesh.

    Kucth-Gujarat.

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